सहवाग की तरह करता चौके-छक्कों की बारिश, अकेले दम पर जिताने की रखता क्षमता, फिर भी कोच गंभीर कर रहे नजरअंदाज

सहवाग की तरह करता चौके-छक्कों की बारिश, अकेले दम पर जिताने की रखता क्षमता—फिर भी कोच गंभीर कर रहे नजरअंदाज सहवाग की तरह करता चौके-छक्कों की बारिश, अकेले दम पर जिताने की रखता क्षमता—फिर भी कोच गंभीर कर रहे नजरअंदाज

भारतीय क्रिकेट में जब भी विस्फोटक बल्लेबाज़ी की बात होती है, तो तुलना सीधे वीरेंद्र सहवाग जैसे खिलाड़ियों से होने लगती है। घरेलू क्रिकेट में एक ऐसा ही नाम लगातार सुर्खियों में रहा है—सरफराज खान। मैदान पर उनका अंदाज़, आक्रामक स्ट्रोक्स और लंबे समय तक क्रीज पर टिके रहने की क्षमता उन्हें खास बनाती है। बावजूद इसके, मौजूदा टीम चयन और प्लेइंग इलेवन में उन्हें वह भरोसा नहीं मिल पा रहा, जिसके वह हकदार माने जा रहे हैं। खास तौर पर हेड कोच गौतम गंभीर के कार्यकाल में सरफराज को लगातार नजरअंदाज किया जाना क्रिकेट गलियारों में बहस का विषय बन गया है।

घरेलू क्रिकेट में निरंतरता, फिर भी इंतजार

सरफराज खान का घरेलू रिकॉर्ड किसी से छिपा नहीं है। पिछले कई सीज़न से रणजी ट्रॉफी और अन्य घरेलू टूर्नामेंट्स में उनका बल्ला लगातार बोल रहा है। बड़े स्कोर बनाना, मुश्किल परिस्थितियों में टीम को संभालना और जरूरत पड़ने पर तेजी से रन जुटाना—यह सब उनकी बल्लेबाज़ी की पहचान बन चुकी है। चयनकर्ताओं के लिए अक्सर घरेलू प्रदर्शन को टेस्ट क्रिकेट का पैमाना माना जाता है, लेकिन सरफराज के मामले में यह पैमाना उल्टा पड़ता दिख रहा है।

भारत के लिए मिले सीमित मौके, लेकिन प्रभावशाली प्रदर्शन

जब भी सरफराज को भारत के लिए खेलने का अवसर मिला, उन्होंने खुद को साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इंग्लैंड के खिलाफ डेब्यू टेस्ट सीरीज़ में उन्होंने सम्मानजनक योगदान दिया और टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई। खासकर देवदत्त पडिक्कल के साथ उनकी साझेदारी को क्रिकेट विशेषज्ञों ने मैच का टर्निंग पॉइंट बताया था। यह साझेदारी सिर्फ रन बनाने तक सीमित नहीं थी, बल्कि दबाव में धैर्य और समझदारी का भी उदाहरण थी।

बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के बाद अचानक बाहर

घरेलू क्रिकेट में वर्षों की मेहनत के बाद 2023 में इंग्लैंड के खिलाफ पहला टेस्ट कॉल-अप सरफराज के करियर का बड़ा पड़ाव माना गया। हालांकि, 2024-25 की बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के बाद तस्वीर पूरी तरह बदल गई। उन्हें न सिर्फ प्लेइंग इलेवन से बाहर किया गया, बल्कि टीम से भी ड्रॉप कर दिया गया। हैरानी की बात यह रही कि इस फैसले के पीछे कोई स्पष्ट क्रिकेटिंग वजह सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई।

चयन नीति पर उठे सवाल

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के चीफ सेलेक्टर अजीत अगरकर और हेड कोच गौतम गंभीर की चयन नीति को लेकर सवाल उठने लगे हैं। कई पूर्व खिलाड़ी और क्रिकेट एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर घरेलू प्रदर्शन को प्राथमिकता नहीं दी जाएगी, तो युवा खिलाड़ियों का मनोबल टूट सकता है। सरफराज जैसे बल्लेबाज़, जो लगातार रन बना रहे हों, उन्हें लंबे समय तक नजरअंदाज करना टीम के भविष्य के लिए भी नुकसानदेह हो सकता है।

दिलीप वेंगसरकर की खुली नाराज़गी

पूर्व भारतीय क्रिकेटर दिलीप वेंगसरकर ने सरफराज को नजरअंदाज किए जाने पर खुलकर नाराज़गी जताई है। उनका कहना है कि घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी को बार-बार मौका मिलना चाहिए। वेंगसरकर ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सीमित अवसरों में भी सरफराज ने खुद को साबित किया है, ऐसे में उन्हें बाहर रखना समझ से परे है। उनका तर्क है कि चयन में पारदर्शिता और प्रदर्शन-आधारित फैसला होना जरूरी है।

सहवाग जैसी बल्लेबाज़ी, लेकिन भरोसे की कमी

सरफराज की बल्लेबाज़ी में जो सबसे बड़ी बात नज़र आती है, वह है निडरता। वह गेंदबाज़ों पर हावी होने की क्षमता रखते हैं और मैच का रुख अकेले दम पर बदल सकते हैं। यही गुण कभी सहवाग की पहचान हुआ करता था। फर्क सिर्फ इतना है कि सहवाग को अपने दौर में लगातार मौके और भरोसा मिला, जबकि सरफराज आज भी उस भरोसे की तलाश में हैं।

टीम संयोजन या रणनीतिक सोच?

कुछ विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा टीम मैनेजमेंट एक खास तरह के बल्लेबाज़ी संयोजन पर काम कर रहा है, जिसमें सरफराज फिट नहीं बैठते। लेकिन सवाल यह है कि क्या रणनीति प्रदर्शन से ऊपर हो सकती है? टेस्ट क्रिकेट में जहां धैर्य और रन बनाने की क्षमता सबसे अहम होती है, वहां सरफराज जैसे बल्लेबाज़ का होना टीम के लिए फायदेमंद ही साबित हो सकता है।

आगे क्या?

सरफराज खान का करियर इस वक्त एक ऐसे मोड़ पर है, जहां एक सही मौका उनकी किस्मत बदल सकता है। चयनकर्ताओं और कोचिंग स्टाफ के लिए यह सोचने का समय है कि क्या वे घरेलू क्रिकेट में लगातार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी को लंबे समय तक नजरअंदाज कर सकते हैं। क्रिकेट इतिहास गवाह है कि प्रतिभा को ज्यादा देर तक दबाया नहीं जा सकता।

भारतीय क्रिकेट फैंस की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दौरों और सीरीज़ में सरफराज को दोबारा मौका मिलता है या नहीं। अगर उन्हें सही मंच और भरोसा मिला, तो वह न सिर्फ टीम इंडिया के लिए मैच विनर साबित हो सकते हैं, बल्कि चयन नीति पर उठ रहे तमाम सवालों का जवाब भी बल्ले से दे सकते हैं।

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