140+ की स्पीड से गेंद से मचाया तहलका, वनडे में चटकाए 206 विकेट, फिर भी टीम इंडिया में नहीं मिला मौका

140+ की स्पीड से गेंद से मचाया तहलका, वनडे में चटकाए 206 विकेट, फिर भी टीम इंडिया में नहीं मिला मौका 140+ की स्पीड से गेंद से मचाया तहलका, वनडे में चटकाए 206 विकेट, फिर भी टीम इंडिया में नहीं मिला मौका

टीम इंडिया में जब भी तेज गेंदबाजों की बात होती है, तो मोहम्मद शमी का नाम अपने आप चर्चा में आ जाता है। 140 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा की रफ्तार, सीम पर सटीक मूवमेंट और हर हालात में विकेट निकालने की काबिलियत—शमी उन गिने-चुने गेंदबाजों में शामिल हैं, जिन्होंने भारतीय तेज गेंदबाजी की परिभाषा ही बदल दी। इसके बावजूद, वनडे क्रिकेट में 206 विकेट लेने वाले इस अनुभवी गेंदबाज को न्यूजीलैंड सीरीज के लिए टीम इंडिया में मौका नहीं मिला, जिसने क्रिकेट फैंस और विशेषज्ञों को चौंका दिया है।

यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब शमी पूरी तरह फिट माने जा रहे हैं और हाल के बड़े मुकाबलों में भारत के लिए मैच विनर साबित हुए हैं। सवाल यही उठ रहा है कि इतने शानदार आंकड़ों और अनुभव के बावजूद आखिर शमी को टीम से बाहर क्यों रखा गया?

आंकड़े जो खुद बयान करते हैं कहानी

मोहम्मद शमी के वनडे करियर पर नजर डालें, तो उनके आंकड़े किसी भी टॉप इंटरनेशनल तेज गेंदबाज से कम नहीं हैं। 200 से ज्यादा विकेट, बेहतरीन स्ट्राइक रेट और दबाव वाले मैचों में लगातार विकेट निकालने की क्षमता—ये सब शमी को खास बनाते हैं।

वनडे क्रिकेट में 206 विकेट लेना सिर्फ लंबी उम्र का सबूत नहीं होता, बल्कि यह दर्शाता है कि खिलाड़ी ने सालों तक खुद को इंटरनेशनल स्तर पर प्रासंगिक बनाए रखा। शमी की गेंदबाजी की सबसे बड़ी ताकत उनकी सीम पोजिशन और सटीक लाइन-लेंथ रही है, जिससे बल्लेबाजों को खेलने में लगातार परेशानी होती है।

140+ की रफ्तार और पुरानी गेंद का जादू

शमी उन तेज गेंदबाजों में शामिल हैं, जो नई और पुरानी—दोनों गेंदों से असर डालते हैं। नई गेंद से स्विंग और सीम मूवमेंट, तो पुरानी गेंद से रिवर्स स्विंग—यह कॉम्बिनेशन बहुत कम गेंदबाजों के पास होता है। यही वजह है कि विदेशी पिचों पर भी शमी का रिकॉर्ड मजबूत रहा है।

ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड या न्यूजीलैंड—हर जगह शमी ने यह साबित किया कि वह सिर्फ घरेलू परिस्थितियों के गेंदबाज नहीं हैं। उनकी रफ्तार 140+ बनी रहती है, लेकिन असली खतरा उनकी सटीकता से आता है, जो बल्लेबाजों को गलती करने पर मजबूर करती है।

बड़े मैचों का खिलाड़ी

मोहम्मद शमी को हमेशा “बड़े मैचों का खिलाड़ी” माना गया है। ICC टूर्नामेंट्स में उनका प्रदर्शन इस बात का सबसे बड़ा सबूत है। जब टीम इंडिया को विकेट की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, तब शमी अक्सर कप्तान की पहली पसंद रहे हैं।

ऐसे में न्यूजीलैंड जैसी मजबूत टीम के खिलाफ वनडे सीरीज में उनका बाहर होना कई सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि शमी जैसे गेंदबाज की मौजूदगी सिर्फ विकेट नहीं दिलाती, बल्कि पूरी गेंदबाजी यूनिट को आत्मविश्वास देती है।

फिर भी मौका क्यों नहीं?

शमी को टीम में जगह न मिलने की सबसे बड़ी वजह वर्कलोड मैनेजमेंट और भविष्य की योजना बताई जा रही है। टीम मैनेजमेंट अब युवा तेज गेंदबाजों को ज्यादा मौके देना चाहता है, ताकि आने वाले वर्षों के लिए एक मजबूत बेंच स्ट्रेंथ तैयार की जा सके।

इसके अलावा, फिटनेस को लेकर भी चयनकर्ता कोई जोखिम नहीं लेना चाहते। लंबे सीजन और लगातार क्रिकेट के चलते सीनियर खिलाड़ियों को रोटेशन में रखा जा रहा है। हालांकि, यह तर्क तब कमजोर पड़ जाता है, जब देखा जाता है कि शमी पूरी तरह फिट हैं और हालिया फॉर्म भी उनके पक्ष में है।

क्या यह ट्रांजिशन का दौर है?

भारतीय क्रिकेट इस वक्त बदलाव के दौर से गुजर रहा है। जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद सिराज और युवा तेज गेंदबाजों की नई पीढ़ी को आगे लाने की कोशिश हो रही है। ऐसे में शमी जैसे अनुभवी खिलाड़ी को कुछ सीरीज में आराम देना रणनीति का हिस्सा हो सकता है।

लेकिन सवाल यह भी है कि क्या इतने अनुभवी और सफल गेंदबाज को सिर्फ “ट्रांजिशन” के नाम पर बाहर रखना सही है? खासकर तब, जब सामने न्यूजीलैंड जैसी अनुशासित टीम हो, जिसके खिलाफ अनुभव बड़ी भूमिका निभाता है।

फैंस और विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया

शमी को टीम से बाहर किए जाने पर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई पूर्व क्रिकेटरों और विश्लेषकों ने इसे हैरान करने वाला फैसला बताया। फैंस का मानना है कि 206 विकेट लेने वाला गेंदबाज आज भी भारत के सर्वश्रेष्ठ वनडे बॉलर्स में से एक है और उसे नजरअंदाज करना आसान नहीं होना चाहिए।

आगे की राह

यह तय है कि मोहम्मद शमी का अंतरराष्ट्रीय करियर अभी खत्म नहीं हुआ है। टेस्ट क्रिकेट में उनकी अहमियत अब भी बरकरार है और बड़े टूर्नामेंट्स में उनका अनुभव टीम इंडिया के लिए अमूल्य रहेगा। संभव है कि वनडे टीम से बाहर होना सिर्फ अस्थायी फैसला हो।

अगर आने वाले समय में टीम इंडिया को अनुभव की जरूरत पड़ी, तो शमी की वापसी में कोई हैरानी नहीं होगी। उनकी फिटनेस, अनुभव और विकेट लेने की भूख आज भी उतनी ही मजबूत है।

140+ की रफ्तार, 206 वनडे विकेट और बड़े मैचों में निर्णायक प्रदर्शन—इन सबके बावजूद मोहम्मद शमी का टीम इंडिया से बाहर होना एक कठिन फैसला माना जा रहा है। यह फैसला रणनीति और भविष्य की सोच का हिस्सा हो सकता है, लेकिन शमी जैसे गेंदबाज का योगदान भारतीय क्रिकेट इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा।

आज भी जब गेंद हाथ में होती है, तो शमी साबित करते हैं कि क्लास कभी आउट ऑफ फॉर्म नहीं होती—बस मौके की जरूरत होती है।

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