टीम इंडिया की हालिया घोषणा ने साफ संकेत दे दिया है कि भारतीय क्रिकेट अब सिर्फ नामों और अनुभव के सहारे नहीं, बल्कि इम्पैक्ट और मैच-विनिंग क्षमता के आधार पर आगे बढ़ रहा है। इसी सोच का सबसे बड़ा उदाहरण है नीतीश कुमार रेड्डी का भारतीय टीम में चयन। क्रिकेट गलियारों में उन्हें अब “दूसरा इरफान पठान” कहा जाने लगा है—और इसके पीछे वजह सिर्फ तुलना नहीं, बल्कि उनका ऑलराउंड प्रोफाइल है।
इस चयन के पीछे जिस रणनीतिक दिमाग की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, वह है गौतम गंभीर की सोच। गंभीर लंबे समय से ऐसे खिलाड़ियों के पक्षधर रहे हैं जो एक ही मैच में गेंद और बल्ले—दोनों से फर्क पैदा कर सकें।
क्यों कहा जा रहा है नीतीश कुमार रेड्डी को ‘दूसरा इरफान पठान’?
जब इरफान पठान ने इंटरनेशनल क्रिकेट में कदम रखा था, तब उनकी सबसे बड़ी ताकत थी—
नई गेंद से स्विंग, मिडिल ओवर्स में कंट्रोल और निचले क्रम में उपयोगी, कभी-कभी मैच जिताने वाली बल्लेबाज़ी।
नीतीश कुमार रेड्डी का प्रोफाइल भी कुछ ऐसा ही दिखता है।
- वह फास्ट-बॉलिंग ऑलराउंडर हैं
- नई गेंद से सीम और स्विंग दोनों करा सकते हैं
- 135–140 किमी/घंटा की गति
- और सबसे अहम—दबाव में बल्लेबाज़ी करने की क्षमता
यही वजह है कि चयनकर्ताओं ने उन्हें सिर्फ “एक और युवा खिलाड़ी” नहीं, बल्कि भविष्य का ऑलराउंड मैच-विनर मानकर टीम में शामिल किया है।
घरेलू क्रिकेट और IPL ने खोले दरवाजे
नीतीश कुमार रेड्डी का नाम अचानक चर्चा में नहीं आया। घरेलू क्रिकेट में आंध्र प्रदेश के लिए खेलते हुए उन्होंने लगातार प्रदर्शन किया है।
IPL में मिले मौकों का उन्होंने पूरा फायदा उठाया—खासकर उन मैचों में जहां टीम संकट में थी।
उनकी बल्लेबाज़ी की सबसे बड़ी खासियत है क्लियर माइंडसेट। वह न सिर्फ स्ट्राइक रोटेट करते हैं, बल्कि जरूरत पड़ने पर बड़े शॉट खेलने से भी नहीं डरते। गेंदबाज़ी में वह कप्तान को विकल्प देते हैं—नई गेंद, मिडिल ओवर्स या ब्रेकथ्रू की जरूरत हो, रेड्डी भरोसेमंद साबित हुए हैं।
गंभीर की रणनीति: इम्पैक्ट प्लेयर्स पर फोकस
गौतम गंभीर की क्रिकेट सोच हमेशा साफ रही है—
“टीम में ऐसे खिलाड़ी चाहिए जो मैच का रुख बदल सकें, न कि सिर्फ अपनी भूमिका निभाकर निकल जाएं।”
नीतीश कुमार रेड्डी का चयन इसी दर्शन का नतीजा माना जा रहा है। मौजूदा दौर में जब भारतीय टीम में विशेषज्ञ बल्लेबाज़ और गेंदबाज़ पहले से मौजूद हैं, तब एक ऐसा ऑलराउंडर जो बैलेंस के साथ एक्स-फैक्टर दे सके, बेहद अहम हो जाता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह चयन सिर्फ एक सीरीज के लिए नहीं, बल्कि अगले 4–5 साल की योजना का हिस्सा है।
आंकड़े जो चयन को सही ठहराते हैं
अगर नीतीश कुमार रेड्डी के हालिया प्रदर्शन पर नजर डालें, तो उनके आंकड़े बताते हैं कि यह चयन भावनात्मक नहीं, बल्कि पूरी तरह डेटा-बेस्ड है।
- घरेलू क्रिकेट में लगातार विकेट
- डेथ ओवर्स में बेहतर इकॉनमी
- निचले क्रम में उपयोगी रन
- दबाव वाले मैचों में स्ट्राइक रेट में गिरावट नहीं
- यही वो चीजें हैं जो उन्हें बाकी युवा खिलाड़ियों से अलग बनाती हैं।
- टीम इंडिया को क्या फायदा होगा?
- नीतीश कुमार रेड्डी के आने से टीम इंडिया को कई स्तर पर फायदा मिलता है:
- बैटिंग ऑर्डर में गहराई
- एक अतिरिक्त तेज गेंदबाज़ का विकल्प
- टीम कॉम्बिनेशन में फ्लेक्सिबिलिटी
- बड़े मैचों में रिस्क लेने वाला खिलाड़ी
- आज के वनडे और टी20 क्रिकेट में जहां 2–3 ओवर या 15–20 रन पूरा मैच पलट सकते हैं, वहां ऐसे ऑलराउंडर की भूमिका बेहद अहम हो जाती है।
क्या सच में अकेले दम पर मैच जिता सकते हैं?
यह सवाल हर नए खिलाड़ी के साथ उठता है। लेकिन नीतीश कुमार रेड्डी के मामले में जवाब सिर्फ “संभावना” नहीं, बल्कि सबूतों पर आधारित है।
IPL और घरेलू क्रिकेट में उन्होंने ऐसे कई मुकाबले खेले हैं जहां उनका एक स्पेल या 20–25 रन की पारी निर्णायक साबित हुई।
यही गुण कभी इरफान पठान की पहचान था—और शायद इसी वजह से यह तुलना अब जोर पकड़ रही है।
आगे की राह
- टीम इंडिया में जगह मिलना शुरुआत है, मंज़िल नहीं। नीतीश कुमार रेड्डी के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती होगी—
- निरंतरता
- फिटनेस
- और इंटरनेशनल दबाव से तालमेल
- अगर वह इन तीनों मोर्चों पर खरे उतरते हैं, तो भारतीय क्रिकेट को लंबे समय के लिए एक ऐसा ऑलराउंडर मिल सकता है, जिसकी तलाश सालों से थी।
नीतीश कुमार रेड्डी का चयन सिर्फ एक नाम जोड़ने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि भारतीय क्रिकेट की सोच में बदलाव का संकेत है। गौतम गंभीर की इस “तगड़ी चाल” ने यह साफ कर दिया है कि टीम इंडिया अब स्पेशलिस्ट नहीं, मैच-विनर ढूंढ रही है।
अगर सब कुछ योजना के मुताबिक चला, तो आने वाले समय में क्रिकेट फैंस सच में कह सकते हैं—
टीम इंडिया को मिल गया है अपना दूसरा इरफान पठान।