घरेलू क्रिकेट में जब कोई बल्लेबाज़ लगातार बड़े स्कोर करता है, तो उसकी गूंज सिर्फ स्कोरकार्ड तक सीमित नहीं रहती। विजय हजारे ट्रॉफी 2025–26 में ठीक यही स्थिति इस समय देवदत्त पडिक्कल के साथ देखने को मिल रही है। विराट कोहली के आईपीएल साथी रहे इस बाएं हाथ के बल्लेबाज़ ने पुडुचेरी के खिलाफ शानदार शतक ठोकते हुए एक बार फिर यह साबित कर दिया कि वह लंबे फॉर्मेट ही नहीं, बल्कि वनडे क्रिकेट के लिए भी पूरी तरह तैयार हैं। 12 चौकों और 3 छक्कों से सजी इस पारी ने टीम इंडिया में उनकी वापसी की चर्चा को नई धार दे दी है।
विजय हजारे ट्रॉफी में पडिक्कल का बल्ला उगल रहा है आग
विजय हजारे ट्रॉफी भारतीय घरेलू क्रिकेट का वह मंच है, जहां से कई खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का टिकट कटाया है। इस सीजन देवदत्त पडिक्कल इसी टूर्नामेंट में सबसे भरोसेमंद बल्लेबाज़ों में गिने जा रहे हैं। पुडुचेरी के खिलाफ खेली गई उनकी शतकीय पारी सिर्फ रनों का आंकड़ा नहीं थी, बल्कि यह दिखाती है कि वह मैच को कैसे पढ़ते हैं और परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालते हैं।
शुरुआती ओवरों में उन्होंने जोखिम से बचते हुए स्ट्राइक रोटेट की, जबकि सेट होने के बाद उन्होंने ढीली गेंदों को सीमा रेखा के बाहर भेजने में कोई कसर नहीं छोड़ी। यही संतुलन उन्हें दूसरे बल्लेबाज़ों से अलग बनाता है।
झारखंड और केरल के खिलाफ पहले ही दे चुके हैं चेतावनी
देवदत्त पडिक्कल का मौजूदा फॉर्म अचानक नहीं आया है। टूर्नामेंट के पहले मैच में झारखंड के खिलाफ 147 रनों की धमाकेदार पारी ने यह संकेत दे दिया था कि वह इस सीजन कुछ बड़ा करने वाले हैं। इसके तुरंत बाद केरल के खिलाफ 124 रन बनाकर उन्होंने यह साफ कर दिया कि यह प्रदर्शन किसी एक दिन की कहानी नहीं है।
लगातार दो बड़े स्कोर के बाद पुडुचेरी के खिलाफ आया शतक उनकी निरंतरता का सबसे मजबूत सबूत है। घरेलू क्रिकेट में चयनकर्ता जिस “consistency” को सबसे ज़्यादा अहमियत देते हैं, उस पैमाने पर पडिक्कल पूरी तरह खरे उतरते दिख रहे हैं।
विराट कोहली के साथ खेलने का असर दिख रहा है साफ
आईपीएल में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के लिए खेलते हुए देवदत्त पडिक्कल को विराट कोहली जैसे दिग्गज के साथ काफी समय बिताने का मौका मिला। इस अनुभव का असर अब उनके खेल में साफ झलकता है।
फिटनेस पर फोकस, लंबे समय तक क्रीज़ पर टिके रहने की मानसिकता और दबाव में भी संयम बनाए रखना—ये सभी गुण अब उनकी बल्लेबाज़ी का हिस्सा बन चुके हैं। घरेलू क्रिकेट में उनका बॉडी लैंग्वेज यह बताता है कि वह खुद को सिर्फ एक रन-स्कोरर नहीं, बल्कि जिम्मेदार टॉप-ऑर्डर बल्लेबाज़ के तौर पर देखते हैं।
बाएं हाथ का विकल्प, जो टीम इंडिया को दे सकता है संतुलन
भारतीय वनडे टीम में दाएं-बाएं हाथ के बल्लेबाज़ों का संयोजन हमेशा एक रणनीतिक हथियार माना गया है। देवदत्त पडिक्कल बाएं हाथ के टॉप-ऑर्डर बल्लेबाज़ हैं, जो मौजूदा सेटअप में टीम को अतिरिक्त संतुलन दे सकते हैं।
उनकी मौजूदगी से विपक्षी गेंदबाज़ों की लाइन-लेंथ बिगड़ती है और फील्ड सेट करने में भी मुश्किल आती है। यही वजह है कि चयनकर्ता घरेलू क्रिकेट में ऐसे खिलाड़ियों पर खास नजर रखते हैं, जो सिर्फ रन ही नहीं बनाते, बल्कि टीम की रणनीति को भी मजबूत करते हैं।
टीम इंडिया में वापसी आसान नहीं, लेकिन दावेदारी मजबूत
यह सच है कि भारतीय टीम में वापसी का रास्ता आसान नहीं होता। प्रतिस्पर्धा बेहद कड़ी है और हर खिलाड़ी को लगातार प्रदर्शन करना पड़ता है। लेकिन देवदत्त पडिक्कल ने इस सीजन यह दिखा दिया है कि वह सिर्फ “फॉर्म में चल रहे खिलाड़ी” नहीं हैं।
उन्होंने तेज गेंदबाज़ों के खिलाफ भी रन बनाए हैं, स्पिन के खिलाफ भी सहज दिखे हैं और दबाव वाले हालात में भी विकेट नहीं फेंके। यही वो संकेत हैं, जिन पर चयनकर्ता भरोसा करते हैं।
विजय हजारे ट्रॉफी बन सकती है करियर का टर्निंग पॉइंट
भारतीय क्रिकेट में कई नाम ऐसे हैं, जिनका करियर किसी एक घरेलू सीजन के बाद पूरी तरह बदल गया। देवदत्त पडिक्कल के लिए विजय हजारे ट्रॉफी 2025–26 वैसा ही टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती है।
अगर वह आने वाले मैचों में भी इसी लय को बनाए रखते हैं, तो टीम इंडिया का दरवाज़ा ज्यादा देर तक बंद रहना मुश्किल होगा। फिलहाल इतना तय है कि 12 चौके और 3 छक्कों से सजी यह शतकीय पारी सिर्फ एक मैच की कहानी नहीं, बल्कि राष्ट्रीय टीम के चयन की दौड़ में दी गई एक मजबूत दस्तक है।